Class-M. A ll sem

Subject-Hindi

Compiled by- Dr. Deepa vats

गद्य विधाओं का वर्गीकरण एवं तात्विक स्वरूप
हिंदी साहित्य में गद्य वह साहित्यिक रूप है जो सामान्य बोलचाल की भाषा के निकट होता है और भावों, विचारों तथा तथ्यों की अभिव्यक्ति को सरल, स्पष्ट एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। गद्य की विविध विधाएँ अपने-अपने उद्देश्य, शिल्प और विषय-वस्तु के आधार पर विकसित हुई हैं।
1. गद्य विधाओं का वर्गीकरण
गद्य विधाओं को सामान्यतः निम्न वर्गों में बाँटा जाता है—
(क) कथात्मक गद्य
जिसमें कथा या कहानी का तत्व प्रमुख होता है—
उपन्यास – विस्तृत कथानक, चरित्र-चित्रण और सामाजिक यथार्थ का चित्रण
कहानी – सीमित कथानक, एक प्रभाव या घटना पर केंद्रित
नाटक – संवाद और अभिनय के माध्यम से कथा प्रस्तुति
कथा-रिपोर्ताज – यथार्थ घटनाओं का कथात्मक वर्णन
(ख) विचारात्मक गद्य
जिसमें चिंतन, तर्क और विश्लेषण प्रमुख होता है—
निबंध – किसी विषय पर व्यक्तिपरक या वस्तुनिष्ठ विचार
आलोचना – साहित्यिक कृतियों का मूल्यांकन
संपादकीय – समसामयिक विषयों पर तर्कपूर्ण अभिव्यक्ति
शोध-लेख – तथ्यात्मक एवं विश्लेषणात्मक लेखन
(ग) वर्णनात्मक गद्य
जिसमें दृश्य, घटना या स्थिति का सजीव वर्णन होता है—
यात्रा-वृत्तांत – यात्रा अनुभवों का वर्णन
संस्मरण – स्मृतियों पर आधारित लेखन
जीवनी – किसी व्यक्ति के जीवन का क्रमबद्ध वर्णन
आत्मकथा – लेखक का स्वयं का जीवन-वृत्त
(घ) पत्रकारिता एवं व्यावहारिक गद्य
व्यवहार और सूचना प्रधान गद्य—
समाचार
रिपोर्ताज
पत्र लेखन
प्रशासनिक एवं कार्यालयी गद्य
2. गद्य का तात्विक स्वरूप
गद्य का तात्विक स्वरूप उसकी मूल विशेषताओं को स्पष्ट करता है—
स्वाभाविकता – गद्य भाषा स्वाभाविक और सहज होती है
स्पष्टता – विचारों की स्पष्ट और तार्किक अभिव्यक्ति
विचार-प्रधानता – भाव के साथ चिंतन का संतुलन
विविधता – विषय, शैली और उद्देश्य में व्यापक विविधता
यथार्थ-बोध – सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और वैचारिक यथार्थ का चित्रण
शिल्पगत लचीलापन – भाषा और शैली में स्वतंत्रता
निष्कर्ष
गद्य विधाएँ साहित्य को सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और बौद्धिक चिंतन से जोड़ती हैं। उनका वर्गीकरण साहित्य के विविध रूपों को समझने में सहायक है, जबकि तात्विक स्वरूप गद्य की आत्मा को स्पष्ट करता है। गद्य साहित्य आधुनिक जीवन की जटिलताओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है।

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