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Subject : Prachin evam madhyakalin kavya 

संक्षिप्त जीवन परिचय
  • नाम: गोस्वामी तुलसीदास।
  • बचपन का नाम: रामबोला (जन्म के समय उनके मुख से 'राम' शब्द निकला था)।
  • जन्म: सन् 1532 (संवत 1589) में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के राजापुर गांव में हुआ था। (कुछ विद्वान इनका जन्म स्थान 'सोरो' भी मानते हैं)।
  • माता-पिता: पिता का नाम आत्माराम दुबे और माता का नाम हुलसी था।
  • गुरु: इनके दीक्षा गुरु नरहरिदास (नरहरि बाबा) थे।
  • पत्नी: इनका विवाह दीनबंधु पाठक की पुत्री रत्नावली से हुआ था।
  • मृत्यु: सन् 1623 (संवत 1680) में वाराणसी के अस्सी घाट पर हुई। 
प्रमुख रचनाएँ
तुलसीदास जी ने कुल 12 प्रामाणिक ग्रंथों की रचना की है: 
  • रामचरितमानस: यह उनका सबसे प्रसिद्ध महाकाव्य है, जो अवधी भाषा में लिखा गया है।
  • अन्य प्रमुख कृतियाँ: विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली, दोहावली, हनुमान चालीसा, जानकी मंगल, पार्वती मंगल और बरवै रामायण। 
साहित्यिक विशेषताएँ
  • भाषा: उन्होंने अवधी और ब्रज दोनों भाषाओं में अधिकारपूर्वक काव्य रचना की।
  • भक्ति भावना: उनकी भक्ति 'दास्य भाव' की थी, जिसमें वे स्वयं को भगवान राम का सेवक मानते थे।
  • समाज सुधार: उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में नैतिकता, करुणा और समानता के आदर्श स्थापित किए। 
Class - BA l st yr.
Subject - Agricultural Marketing & Finance in India
Subject type - Minor ll
By AP N Jaiswal


E-technology is transforming agriculture finance systems by leveraging digital tools to improve farmers' access to
credit, insurance, subsidies, and market information, promoting transparency and efficiency. Key applications include digital payments, data-driven credit risk assessment, and integrated online platforms.

Key E-Technology Applications in Agriculture Finance

  • Direct Benefit Transfer (DBT):
  • Digital Loan Data and Credit Access
    • Data Analytics and AI
  • Unified Farmer Service Platform (UFSP)
  • Crop Insurance and Risk Management
  • Online Marketplaces (e-NAM)
  • Financial Inclusion Platforms
  • Targeted Financial Support

Benefits

  • Enhanced Transparency
  • Improved Efficiency
  • Better Decision Making
  • Increased Financial Inclusion
Subject : Anuvad vigyan

वाणिज्यिक अनुवाद


वाणिज्यिक (Commercial) क्षेत्र में अनुवाद एक जटिल कार्य है क्योंकि इसमें केवल शब्दों का अनुवाद नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और कानूनी बारीकियों का ध्यान रखना आवश्यक होता है। 
वाणिज्यिक अनुवाद की प्रमुख समस्याएँ:
  1. तकनीकी शब्दावली (Technical Terminology): वाणिज्यिक क्षेत्र में बैंकिंग, बीमा, और कानून से जुड़े विशिष्ट शब्द होते हैं। सटीक शब्द न मिलने पर अर्थ का अनर्थ हो सकता है [1]।
  2. सांस्कृतिक अनुकूलन (Cultural Adaptation): एक देश के विज्ञापन या नारे दूसरे देश की संस्कृति में अपमानजनक या प्रभावहीन हो सकते हैं [2]।
  3. कानूनी भिन्नता: हर देश के व्यावसायिक नियम और अनुबंध (Contracts) अलग होते हैं। अनुवाद में छोटी सी गलती कानूनी विवाद पैदा कर सकती है [2]।
  4. शब्दानुवाद (Literal Translation): मुहावरों या व्यावसायिक वाक्यांशों का शब्द-दर-शब्द अनुवाद अक्सर गलत संदेश देता है [1]।
समाधान के उपाय:
  1. विषय विशेषज्ञों का चयन: अनुवादक को न केवल भाषा, बल्कि वाणिज्य (Commerce) और अर्थशास्त्र की गहरी समझ होनी चाहिए [2]।
  2. अनुवाद स्मृति (Translation Memory) का उपयोग: SDL Trados जैसे टूल्स का उपयोग करके शब्दावली में निरंतरता (Consistency) बनाए रखी जा सकती है [1]।
  3. लोकालाइजेशन (Localization): संदेश को स्थानीय संस्कृति और रीति-रिवाजों के अनुसार ढालना चाहिए, न कि केवल अनुवाद करना चाहिए [2]।
  4. बहु-स्तरीय समीक्षा: अनुवाद के बाद कानूनी विशेषज्ञों और भाषा विशेषज्ञों द्वारा 'प्रूफरीडिंग' अनिवार्य होनी चाहिए।
वाणिज्यिक अनुवाद सेवाओं के बारे में अधिक जानने के लिए आप American Translators Association (ATA) के संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं।
क्या आप किसी विशिष्ट दस्तावेज़ (जैसे अनुबंध या मार्केटिंग ब्रोशर) के अनुवाद के लिए रणनीतियाँ जानना चाहते हैं?

Subject-Hindi

Compiled by- Dr. Deepa vats

गद्य विधाओं का वर्गीकरण एवं तात्विक स्वरूप
हिंदी साहित्य में गद्य वह साहित्यिक रूप है जो सामान्य बोलचाल की भाषा के निकट होता है और भावों, विचारों तथा तथ्यों की अभिव्यक्ति को सरल, स्पष्ट एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। गद्य की विविध विधाएँ अपने-अपने उद्देश्य, शिल्प और विषय-वस्तु के आधार पर विकसित हुई हैं।
1. गद्य विधाओं का वर्गीकरण
गद्य विधाओं को सामान्यतः निम्न वर्गों में बाँटा जाता है—
(क) कथात्मक गद्य
जिसमें कथा या कहानी का तत्व प्रमुख होता है—
उपन्यास – विस्तृत कथानक, चरित्र-चित्रण और सामाजिक यथार्थ का चित्रण
कहानी – सीमित कथानक, एक प्रभाव या घटना पर केंद्रित
नाटक – संवाद और अभिनय के माध्यम से कथा प्रस्तुति
कथा-रिपोर्ताज – यथार्थ घटनाओं का कथात्मक वर्णन
(ख) विचारात्मक गद्य
जिसमें चिंतन, तर्क और विश्लेषण प्रमुख होता है—
निबंध – किसी विषय पर व्यक्तिपरक या वस्तुनिष्ठ विचार
आलोचना – साहित्यिक कृतियों का मूल्यांकन
संपादकीय – समसामयिक विषयों पर तर्कपूर्ण अभिव्यक्ति
शोध-लेख – तथ्यात्मक एवं विश्लेषणात्मक लेखन
(ग) वर्णनात्मक गद्य
जिसमें दृश्य, घटना या स्थिति का सजीव वर्णन होता है—
यात्रा-वृत्तांत – यात्रा अनुभवों का वर्णन
संस्मरण – स्मृतियों पर आधारित लेखन
जीवनी – किसी व्यक्ति के जीवन का क्रमबद्ध वर्णन
आत्मकथा – लेखक का स्वयं का जीवन-वृत्त
(घ) पत्रकारिता एवं व्यावहारिक गद्य
व्यवहार और सूचना प्रधान गद्य—
समाचार
रिपोर्ताज
पत्र लेखन
प्रशासनिक एवं कार्यालयी गद्य
2. गद्य का तात्विक स्वरूप
गद्य का तात्विक स्वरूप उसकी मूल विशेषताओं को स्पष्ट करता है—
स्वाभाविकता – गद्य भाषा स्वाभाविक और सहज होती है
स्पष्टता – विचारों की स्पष्ट और तार्किक अभिव्यक्ति
विचार-प्रधानता – भाव के साथ चिंतन का संतुलन
विविधता – विषय, शैली और उद्देश्य में व्यापक विविधता
यथार्थ-बोध – सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और वैचारिक यथार्थ का चित्रण
शिल्पगत लचीलापन – भाषा और शैली में स्वतंत्रता
निष्कर्ष
गद्य विधाएँ साहित्य को सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और बौद्धिक चिंतन से जोड़ती हैं। उनका वर्गीकरण साहित्य के विविध रूपों को समझने में सहायक है, जबकि तात्विक स्वरूप गद्य की आत्मा को स्पष्ट करता है। गद्य साहित्य आधुनिक जीवन की जटिलताओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है।

Subject : Anuvad vigyan

अनुवाद के विभिन्न क्षेत्रो मे अनुवाद की समस्या एवं समाधान
कार्यालयीन क्षेत्र (Official/Administrative field) में अनुवाद एक जटिल प्रक्रिया है क्योंकि यहाँ भाषा की सटीकता और प्रशासनिक मर्यादा का बहुत महत्व होता है। 
कार्यालयीन अनुवाद की मुख्य समस्याएँ और उनके समाधान निम्नलिखित हैं:
1. मुख्य समस्याएँ (Challenges)
  • पारिभाषिक शब्दावली का अभाव: प्रशासनिक कार्यों में विशिष्ट शब्दों (Terminology) का प्रयोग होता है। कई बार अंग्रेजी के प्रशासनिक शब्दों के लिए हिंदी में सटीक या सरल समानार्थी शब्द नहीं मिलते [1].
  • वाक्य संरचना की जटिलता: सरकारी दस्तावेजों और कानूनी मसौदों में वाक्य बहुत लंबे और जटिल होते हैं। इनका अनुवाद करते समय मूल अर्थ खोने का डर रहता है [1].
  • मशीनी अनुवाद की सीमाएं: Google Translate जैसे टूल्स का उपयोग करने पर व्याकरणिक त्रुटियाँ और अर्थ का अनर्थ होने की संभावना बनी रहती है, क्योंकि मशीन संदर्भ (Context) को नहीं समझ पाती [2].
  • सांस्कृतिक और भाषाई अंतर: अंग्रेजी और हिंदी की प्रकृति अलग है। अंग्रेजी 'Passive Voice' प्रधान है, जबकि हिंदी 'Active Voice' में अधिक स्पष्ट लगती है। सरकारी अनुवाद में अक्सर यह तालमेल नहीं बैठ पाता [3].
  • प्रशिक्षित अनुवादकों की कमी: कार्यालयों में अक्सर सामान्य कर्मचारियों से अनुवाद कराया जाता है, जिन्हें अनुवाद के सिद्धांतों और पारिभाषिक शब्दावली का गहरा ज्ञान नहीं होता [1].
2. समाधान (Solutions)
  • मानक शब्दकोशों का प्रयोग: अनुवादकों को वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग (CSTT) द्वारा तैयार किए गए मानक शब्दकोशों का उपयोग करना चाहिए [1].
  • सरलीकरण (Simplification): अनुवाद को बोझिल संस्कृतनिष्ठ शब्दों के बजाय सरल और बोधगम्य भाषा में किया जाना चाहिए, ताकि आम जनता उसे समझ सके [3].
  • मशीनी अनुवाद + मानवीय संपादन (Post-editing): तकनीक का सहारा जरूर लें, लेकिन अंतिम ड्राफ्ट को किसी विशेषज्ञ अनुवादक द्वारा जांचा जाना अनिवार्य होना चाहिए ताकि व्याकरणिक और संदर्भ संबंधी गलतियां सुधारी जा सकें [2].
  • नियमित प्रशिक्षण: कार्यालयीन कर्मचारियों के लिए समय-समय पर अनुवाद कार्यशालाओं (Workshops) का आयोजन किया जाना चाहिए ताकि वे नई शब्दावली और तकनीक से अवगत हो सकें [1].
  • संदर्भ का ध्यान: अनुवाद करते समय केवल शब्दों का नहीं, बल्कि भाव और संदर्भ का अनुवाद करना चाहिए। प्रशासनिक पदानुक्रम (Hierarchy) और पदनामों का अनुवाद अत्यंत सावधानी से किया जाना चाहिए [3].
निष्कर्ष: कार्यालयीन अनुवाद केवल भाषा का रूपांतरण नहीं, बल्कि प्रशासनिक संदेश को उसकी मूल भावना के साथ पहुँचाना है। इसके लिए सटीकता, सरलता और स्पष्टता अनिवार्य है।

Class - BA l st yr.
Subject - Agricultural Marketing & Finance in India
Subject type - Minor ll
By AP N Jaiswal


E-technology in Agriculture
Following main trends have been the key drivers of the use of e-technology in agriculture:
• low-cost and pervasive connectivity and adaptable and more affordable tools due to booming
mobile, wireless, and Internet industries
• advances in data storage and exchange due to continuous research in IT sector
• innovative business models and partnerships with government and private sector collaborations

E-technology to Aid Farmers
Governments and private sector have launched a number of e-technology initiatives to harness
the potential of e-technology to tackle various challenges.

Subject-Hindi
Compiled  -Dr. Deepa vats

आधुनिक काल

आधुनिक काल इतिहास का वह चरण है जिसमें समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और संस्कृति में बड़े और तेज़ बदलाव हुए।
भारत के इतिहास में आधुनिक काल
समय-सीमा: सामान्यतः 18वीं शताब्दी के मध्य से 1947 ई. (भारत की स्वतंत्रता) तक
मुख्य घटनाएँ:

यूरोपीय शक्तियों का आगमन और ब्रिटिश शासन

ईस्ट इंडिया कंपनी का विस्तार
1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन
राष्ट्रीय आंदोलन और स्वतंत्रता प्राप्ति
प्रमुख विशेषताएँ

राजनीतिक परिवर्तन: देशी रियासतों का पतन, औपनिवेशिक प्रशासन
आर्थिक बदलाव: कृषि व उद्योगों का शोषण, आधुनिक संचार
सामाजिक सुधार: सती प्रथा का अंत, विधवा पुनर्विवाह, शिक्षा का प्रसार

सांस्कृतिक प्रभाव: आधुनिक शिक्षा, प्रेस, नए विचार (राष्ट्रवाद, लोकतंत्र)